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उस सुनी राह पे - देवेन्द्र देव
उस सुनी राह पे - देवेन्द्र देव

उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद है भले वो इंसान नहीं लेकिन उसका भी वजूद है फैली हुई है उसकी सब शाखे उसे सिर्फ ज़माने का भला करना मंज़ूर है ...

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