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बिस्तर से उतरने के पहले ही आज का शेड्यूल उन्हें रटा गया था |
आज १० बजे भगत सिंह की मूर्ती का माल्यार्पण करना है |१२ बजे युवा कार्यशाला का उदघाटन करना है |शाम ७ बजे शहीद स्मृति सभा की अध्यक्षता करनी है ....
पर सुबह से ही अपना १८ वा बसंत पार कर रही मिठ्ठू के साथ उनका युद्ध भी चालू हो गया था | मिठ्ठू सेमेस्टर खत्म कर छुट्टियाँ मनाने घर आयी थी |
९ बजे जैसे ही नौकर को गलत क्रीज के लिए गाली देने लगे |मिठ्ठू ने बीच में पड़ते हुए कहा “ पापा अभी १२ साल का है वो वैसे भी चाइल्ड लेबर मना है .. आपने उसे किताबों की जगह कपडे पकड़ा दिये हैं | ”

और वे बस तिलमिलाकर कर रह गये..|
शाम इम्पोर्टेड घड़ी की चोरी का कोहराम मच गया |
अंत में मिठ्ठू ने खुलासा किया कि घड़ी उसने छुपायी है क्योंकि वो नहीं चाहती कि पापा एक विदेशी घड़ी पहनकर शहीदों की श्रद्धांजलि का अपमान करें ...
इस दफे उन्होंने आँखे तरेरकर मिठ्ठू को देखा और बुदबुदाते हुए निकल गये ..|
रात्रि भोज पर जब वे ठेका कम्पनी के एजेंट के साथ कमीशन की चर्चा कर रहे थे बदहवास बीबी ने एक पर्चा उनके हाथ में थमाया ... जिसमे लिखा था ..
“ पापा में हास्टल वापस जा रही हूँ ....इस गंदी हवा में मै साँस नहीं ले सकती ....और आप मुझे खर्चा मत भेजना ...मैंने इसके लिए पार्ट टाइम जाब की बात कर ली है .. आपकी मिठ्ठू...”..
“तो भगत सिह का भूत पड़ौसी के बदले ...हमारे बच्चे में ही सवार हो गया....” कहते हुए उन्होंने हिकारत की नज़र बारी बारी से पर्चे और बीबी डाली |

फिर मुस्कुराते हुए एजेंटों के साथ चर्चा में जुट गये...उन्हें भगत सिह के भूत के ज़ल्दी उतर जाने का पक्का भरोसा था |


-हनुमंत शर्मा

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