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हसरत है ये दिल कि, 


हम भी तन्हाई से मिले !
देखे, तमाशा क्या है पूछेंगे,
फिर किसी तमाशाई से मिले !
वफाए हमने भी कि है,
हसरत है अब बेवफाई से मिले !
लोग कहते है बेसबब नहीं ये,
अब किसी कि जुदाई से मिले !
यकी मुझे नहीं, लोग उससे फ़रियाद करते है,
हम  भी उस खुदा कि खुदाई से मिले !
मोहब्बत कि थी हमने मजाक नहीं,
दिल कहता है फिर उस हरजाई से मिले !

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  1. अच्छी पंक्तिया ........


    मेरे ब्लॉग कि संभवतया अंतिम पोस्ट, अपनी राय जरुर दे :-
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html
    कृपया विजेट पोल में अपनी राय अवश्य दे ...

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  2. बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

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