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वो भी सूरज है अपने घर का
पर आज खुद ही घर को जला चूका
कुछ यु बदली है तासीर उसने अपनी
कई बेगानों में वो अपनों का मजाक बना चुका
न जाने कौन सा पर्दा आन पड़ा उसकी आँखों पर
खुद कि तरह वो औरो को अपना शिकार बना चुका

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