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मुझसे जो मोह्हबत करोगे तो क्या पाओगे !
कुछ यु अपना दिल तोड़ोगे की बिखर जाओगे !!
हमने क्या पाया है अब तक वफ़ा करके !
तुम भी सिर्फ वफ़ा-ऐ-दर्द लेकर चले जाओगे !!
बिखरा हु में कुछ इस तरह, की न करो न समेटने की जहमत !
कही अनजाने में अपनी शख्सियत गुम कर जाओगे !!
तकक्लुफ़ कि बात ही तो है ये, की तुम हमसे इश्क करो !
ये इश्क-ऐ-दरिया है हम तो डूबे है तुम भी डूब जाओगे !!
ये चेहरा चाँद से कही ज्यादा रोशन है !
इस मर्ज़ में इस पे कई शिकन ले जाओगे !!

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