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हर वक़्त एक सा नहीं रहता !
दरख्त हमेशा हरा नहीं रहता !!
हम भूल जाते है कि वो भी एक इंसा है !
बन जाता है वो, पर हर इंसा फितरत से बुरा नहीं रहता !!
वो भी खलिश, एक चुभन दिल में लिए बेठा है !
पर ये जुर्म भी उसका दो पल से बड़ा नहीं रहता !!

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