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ये वक़्त, ये तन्हाई और ये दीवानापन,
हमें कही खा न जाये हमारा ये आवारापन !
टूट गए है मोती हमारे ही हाथ से जिन्दगी के ,
कि अब सहन नहीं होती दूजो के रिश्तो कि तपन !!

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