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हिंदुस्तान छोड़ दो - इस्मत चुग़ताई
हिंदुस्तान छोड़ दो - इस्मत चुग़ताई

साहब मर गया जयंतराम ने बाजार से लाए हुए सौदे के साथ यह खबर लाकर दी। 'साहब- कौन साहब? 'वह कांटरिया साहब था न? 'वह क...

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समर यात्रा - मुंशी प्रेमचंद
समर यात्रा - मुंशी प्रेमचंद

आज सवेरे ही से गाँव में हलचल मची हुई थी। कच्ची झोंपड़ियाँ हँसती हुई जान पड़ती थीं। आज सत्याग्रहियों का जत्था गाँव में आयेगा। कोदई चौधरी के द...

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अलिफ़ लैला -उपन्यास-2
अलिफ़ लैला -उपन्यास-2

किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का एक बड़ा व्यापारी था जिसके गाँव में बहुत-से घर और कारखाने थे जिनमें तरह-तरह के पशु रहते थे। एक दिन वह अ...

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दूध का दाम - मुंशी प्रेमचंद
दूध का दाम - मुंशी प्रेमचंद

अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व ह...

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